उत्तराखंड की धामी सरकार को खनन क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्यों के लिए देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। केंद्र सरकार द्वारा किए गए मूल्यांकन के बाद राज्य को 200 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी की गई है। इसे खनन नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और पारदर्शी व्यवस्था की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
राज्य में खनन के जरिए लगातार राजस्व में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। साथ ही सरकार की सख्त नीतियों और निगरानी तंत्र के चलते अवैध खनन पर भी लगभग पूरी तरह रोक लग गई है। यह उपलब्धि उन लोगों के लिए करारा जवाब मानी जा रही है, जो प्रदेश में अवैध खनन को लेकर फेक नैरेटिव गढ़ने का प्रयास कर रहे थे। खनन निदेशक राजपाल लेघा द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि सभी जनपदों में अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सरकार का साफ लक्ष्य है कि नियमों के तहत अधिक से अधिक खनन गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए राजस्व वसूली को अधिकतम स्तर तक पहुंचाया जाए।
सरकार का मानना है कि पारदर्शी व्यवस्था, तकनीकी निगरानी और सख्त प्रवर्तन के चलते आने वाले समय में खनन क्षेत्र से राज्य की अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।





